अक्सर हमारे मन में यह सवाल आता है कि आखिर बैंक अमीरों को तो करोड़ों का लोन आसानी से दे देते हैं, लेकिन एक गरीब व्यक्ति को छोटा सा लोन देने के लिए भी चक्कर कटवाते हैं। हम उस असली कारण (Real Reason) का खुलासा करेंगे जो बैंक कभी खुलकर नहीं बताते। बैंक की यह मजबूरी क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) और कोलैटरल (Collateral) से जुड़ी है, जिसके कारण वे चाहकर भी कई बार गरीबों की मदद नहीं कर पाते।
बैंक की मजबूरी: क्यों गरीब को नहीं मिलता लोन?
बैंक एक बिजनेस की तरह काम करते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य जनता के जमा पैसे को सुरक्षित रखना और उस पर मुनाफा कमाना होता है। जब भी बैंक किसी को लोन देते हैं, तो वे सबसे पहले यह देखते हैं कि क्या वह व्यक्ति पैसा वापस कर पाएगा।
गरीबों के पास अक्सर आय का कोई स्थायी स्रोत (Permanent Income Source) या गिरवी रखने के लिए कोई कीमती चीज नहीं होती। इसी कारण बैंकों को लगता है कि उनका पैसा डूब सकता है। बैंक की इस प्रक्रिया को रिस्क असेसमेंट (Risk Assessment) कहा जाता है।
बैंक लोन न देने के 3 मुख्य कारण
| मुख्य कारण | विवरण (Details) |
| कोलैटरल (Collateral) | गरीबों के पास गिरवी रखने के लिए जमीन या सोना नहीं होता। |
| सिबिल स्कोर (CIBIL Score) | बैंकिंग लेन-देन न होने के कारण उनका क्रेडिट इतिहास शून्य होता है। |
| डॉक्यूमेंटेशन (Docs) | इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) या सैलरी स्लिप की कमी होना। |
1. गिरवी रखने के लिए कुछ न होना (No Collateral)
जब बैंक बड़ा लोन देते हैं, तो वे सुरक्षा के तौर पर कुछ गिरवी रखते हैं। इसे ‘कोलैटरल’ कहते हैं। अगर उधार लेने वाला पैसा नहीं चुका पाता, तो बैंक उस चीज को बेचकर अपना पैसा वसूलते हैं।
गरीब व्यक्ति के पास अक्सर ऐसी कोई संपत्ति नहीं होती जिसे बैंक सुरक्षा के तौर पर स्वीकार कर सके। यही सबसे बड़ी वजह है कि बैंक असुरक्षित महसूस करते हैं और लोन देने से कतराते हैं।
2. आय का प्रमाण न होना (Lack of Income Proof)
बैंक को यह भरोसा दिलाना पड़ता है कि आपकी हर महीने इतनी कमाई है कि आप लोन की किस्त (EMI) भर सकें। नौकरीपेशा लोगों के पास सैलरी स्लिप होती है, लेकिन गरीब मजदूर या रेहड़ी-पटरी वालों की आय निश्चित नहीं होती।
दस्तावेजों की इस कमी के कारण बैंक की फाइल अधूरी रह जाती है। बैंक के नियमों के अनुसार, बिना आय के प्रमाण के लोन देना NPA (Non-Performing Asset) बढ़ने का खतरा पैदा करता है।
3. क्रेडिट स्कोर का न होना (No Credit History)
अमीर लोग अक्सर क्रेडिट कार्ड या छोटे लोन लेते रहते हैं, जिससे उनका एक CIBIL Score बन जाता है। बैंक इस स्कोर को देखकर समझ जाते हैं कि यह व्यक्ति ईमानदार है या नहीं।
ज्यादातर गरीब लोग नकद (Cash) में लेन-देन करते हैं, जिससे बैंक के रिकॉर्ड में उनकी कोई ‘साख’ नहीं बन पाती। बैंक के लिए एक अनजान व्यक्ति को पैसा देना बहुत बड़ा रिस्क होता है।
क्या है समाधान? (Government Schemes)
यही कारण है कि सरकार ने PM SVANidhi और Mudra Yojana जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं में सरकार बैंकों को गारंटी देती है कि अगर गरीब व्यक्ति पैसा नहीं चुका पाया, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार लेगी।
Disclaimer: यह लेख बैंकिंग प्रक्रियाओं और सामान्य आर्थिक सिद्धांतों के आधार पर शैक्षिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। बैंक के नियम अलग-अलग स्कीम और बैंक की पॉलिसी के अनुसार बदल सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी बैंक मैनेजर से सलाह लें।